Tuesday, December 17, 2019

नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019



BY-ROBIN SHARMA 

लोकसभा और राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 को हरी झंडी मिलने के बाद राष्ट्रपति की सहमति से नागरिक संशोधन अधिनियम, 2019 बन चुका है, जो कि एक एसा कानून है जो नागरिकता अधिनियम, 1955 मे बदलाव लाने की पहल रखता हैl इस कानून का मुख्य प्रावधान यह हे कि यह कानून तीन देशों बांग्लादेश, पाकिस्तान, और अफगानिस्तान में रह रहे गैर मुस्लिम संगठनों(हिंदू, जैन, ईसाई, सीख, बौद्ध एवं पारसी) के नागरिकों को भारत की नागरिकता प्रदान करता हैl इस अधिनियम के तहत निम्न संगठनों के जिन लोगों को अपने धर्म को मानने के विरोध मे प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है, ये लोग भारत मे आकर रह सकते हैं और उन्हें भारत की नागरिकता दे दी जाएगीl यह कानून फिलहाल मे उन लोगों को नागरिकता देगा जो 31 दिसम्बर 2014 या उससे पहले से भारत मे रह रहे हो इसके अतिरिक्त जो शरणार्थी आगे जाकर अगर भारत मे प्रवेश करते हैं उन्हें छह सालों तक भारत का निवासी बनकर रहना होगाl जिसके बाद ही उन्हें भारत की नागरिकता दी जा सकेगीl इस बिल के समर्थन मे और इस बिल की आवश्यकता का कारण बताते हुए मौजूदा सरकार का कहना है कि तीन ईस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान, अफगानिस्तान, और बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदू, जैन, ईसाई, सीख, बौद्ध, एवं पारसी समुदाय के लोगों को आए दिन धार्मिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता हैl इस संदर्भ में सरकार का कहना है कि इन तीनों देश का संविधान कहता है कि इन देशों का राष्ट्रीय धर्म ईस्लाम है इसके कारण वहॉ गैर मुसलमानों  को प्रताड़ित किया जाता हैl  हमारे देश मे एसा कोई राष्ट्रीय धर्म नहीं हैl




कईं प्रश्न खड़े करता है ये विधेयक


सरकार का इन लोगों के प्रति संवेदनशील होना ज़ायज हैl अगर हमारे धर्म के लोग किसी अन्य देश मे प्रताड़ित किए जा रहे है, तो उनका बचाव करना हमारा कर्तव्य हैl परंतु यहां सबसे बड़ा प्रश्न यह खड़ा होता है कि क्या हमारे देश का कोई धर्म है? क्या हमारा देश किसी विशेष समुदाय के लोगों को ही शरण देता है? क्या हमारे देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था?






इन सभी प्रश्नों का उत्तर है 'ना' क्योंकि हमारा संविधान खुद इसका गवाह हैl संविधान बार बार दोहराता है कि धर्म, जाति, लिंग के आधार पर किसी मे भी भेद नहीं किया जा सकता और जो एसा करता है वो संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता हैl धर्मनिरपेक्षता हमारे देश की पहचान हैl संविधान ने भी इसे सर्वोपरि माना हैl नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 के अंतर्गत इन छह समुदायों के लोगों को नागरिकता देने से भारत की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैंl इसकी वजह यह है कि इन ईस्लामिक देशों मे ना सिर्फ इन छह संगठनों के लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है बल्कि ऐसे कई मुस्लिम समुदाय और ऐसे समुदाय जो किसी धर्म को नहीं मानते हैं, इन लोगों को भी प्रताड़ित किया जाता हैl बांग्लादेश मे ऐसे समुदायों पर कई हमले हुए हैंl इसी के साथ इन तीन देशों के अलावा कई ऐसे हमारे करीबी देश है जहां लोगों को धार्मिक प्रताड़ना झेलना पड़ रही हैl इसका सबसे सही उदाहरण है भूटानl एसे मे सरकार का इस विधेयक के तहत केवल इन तीन देशों के छह संगठनों का बचाव करना इस बात का प्रमाण है कि सरकार हमारे देश की नागरिकता को धर्म के आईने से देख रही हैl इस विधेयक के विरोध मे यह भी कहा जा रहा है कि ये संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन कर रहा है जिसके अंतर्गत सभी को समानता का हक प्रदान किया गया हैl

मेरे अनुसार सरकार का यह विधेयक इतना भी विवादास्पद नहीं है क्योंकि इस विधेयक को लाने के पीछे सरकार की मंशा केवल परोपकार की हैl इस विधेयक के द्वारा सरकार उन अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को सुरक्षित करना चाहती है जो अन्य देशों में धार्मिक प्रताड़ना से जूझ रहे हैl सरकार ने यह विधेयक अन्य देशों के अधिनियमों को परख कर बनाया हैl हालाकि इस बात को भी नकारा नही जा सकता कि यह संशोधित अधिनियम सरकार के लिए चुनौतियों से गृस्त हो सकता हैl मेरे मुताबिक इस अधिनियम के लागू होने के बाद हमारे देश को जनसंख्या मे वृद्धि का सामना करना पड़ सकता हैl अन्य देशों में प्रताड़ना झेल रहे लोग अपने आप को सुरक्षित करने के उद्देश्य से हमारे देश मे पलायन करना उचित समझेंगेl इसके अलावा आसाम, नेपाल और इन देशों की सीमाओं से सटीक राज्यों को अवैध आपृवासी के  प्रवेश का खतरा बड़ जाएगाl

Sunday, December 1, 2019

    

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  गरीबी: भारत देश का भयावह दृश्य 


AUTHOR- ROBIN SHARMA
'गरीबी', कहने को तो एक छोटा सा शब्द लेकिन खुद में इतनी ताकत रखता है कि जिस देश मे हो वहां की अर्थव्यवस्था को डगमगा सकता है l कहते हुए अच्छा तो नहीं लग रहा लेकिन हमारा देश भी उन देशों की सूची मे शामिल है जहाँ आज भी लोग गरीबी से जूझ रहे हैं l गरीबी से कई ज़िंदगियाँ तो मुसीबत मे जी ही रही है, साथ ही साथ इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है जो की गरीबी के चलते कमजोर होती जा रही हैl आज भी हमारे देश मे ऐसे कई इलाके हैं जहां के लोगों को दो वक़्त का खाना नसीब नहीं हो पाता l गरीबी के चलते छोटे छोटे बच्चे भीख मांगने को मजबूर हैं l कई बार तो उन्हें खाली पेट ही सोना पड़ता है l ये हमारे लिए गौरव की बात है कि हमारा देश राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेको उपलब्धियां प्राप्त कर रहा है, लेकिन इसी के साथ हमें इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि हमारे देश में ऐसी कई परिस्थितियां है ऐसी कई घटनाएं हैं जिनकी वजह से हमारा देश तरक्की के पथ पर डगमगा रहा है l इन सब से हम अच्छी तरह से वाकिफ है l आये दिन बलात्कार, हत्याएं, डकैती एवं अनेकों घटनाये इसमें शामिल है l गरीबी भी इसमें प्रमुख रूप से भागीदार है जो की आज का हमारा चर्चा का विषय है l 

हाल ही मे संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह सामने आया कि भारत में अब भी 37 करोड़ लोग गरीब है, जो की पूरी जनसंख्या का तक़रीबन 28% है l ये आंकड़ा दर्शाता है कि किस तरह हम आधुनिकता और चकाचोंध के उजाले मे इस गरीबी रूपी अंधकार को नजरअंदाज कर रहे हैं l हालांकि इस रिपोर्ट के अनुसार भारत मे स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति से लोगों को गरीबी से बाहर निकालने मे मदद मिली है l 2006 से 2016 के बिच रिकॉर्ड 27.10 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं l निःसंदेह सरकार देश से गरीबी मिटाने के पुरे प्रयास कर रही है जिसके परिणाम स्वरुप गरीबी के आंकड़ों मे गिरावट भी आयी है, परन्तु आंकड़े स्थायी नहीं होते l हमें पूर्ण रूप से गरीबी मिटाने की ओर प्रयास करना चाहिए l सरकार आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए योजनाएं तो लागु करती है मगर कहीं ना कहीं इनका सही मायने मे संचालन नहीं हो पाता और परिणाम स्वरुप वे लोग इन योजनाओं से वंचित रह जाते हैं l कई बार तो इन योजनओं का लाभ लेने के लिए जिन प्रक्रियाओं से गुजरना होता है वे इतनी जटिल होती है कि आधे लोग ऐसे ही पीछे हट जाते है l अशिक्षित होना और जागरूकता की कमी भी कुछ मायने मे गरीबी का कारण है l इसलिए सरकार को इन पिछड़ा वर्गों में शिक्षा को बढ़ावा देने की ओर कदम उठाने चाहिए जिससे की जो आने वाली पीढ़ी है उन्हें इन सब परेशानियों का सामना ना करना पड़े l आज की इस बढ़ती आधुनिक जीवनशैली में जिस तरह महंगाई दर में बढ़ोतरी हो रही है और बेरोजगारी की समस्या गहरा रही है, यह आने वाले समय के लिए चिंता का विषय है l

आय की असमानता : गरीबी का सबसे बड़ा कारण
सुनने मे ये बात थोड़ी अजीब लगेगी लेकिन मेरे अनुसार आज भी हमारे देश मे असमानता कायम है l भले ही जात-पात,  ऊंच - नीच के सन्दर्भ मे असमानता मे कमी हुई है लेकिन बहुत से ऐसे क्षेत्र है जिनमे असमानता के चलते लोगों को दुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है l रोजगार के क्षेत्र मे, शिक्षा के क्षेत्र मे, स्वास्थ्य सुविधाओं मे और ऐसे कई क्षेत्र है जिनमे लोगों को समान रूप से नहीं आंका जाता l हमारे देश मे बेरोजगारी की समस्या चरम सीमा पर है और जिसके पास रोजगार है वो भी संतुष्ट नहीं है l आय मे असमानता के चलते यह स्थति हो गई है की एक मध्यम वर्ग का व्यक्ति भी एक निश्चित पूंजी इकट्ठी नहीं कर पाता l गरीब के लिए तो महीने भर का राशन आ जाये बस इसके आगे तो वो सोच भी नहीं सकता l आम आदमी को हर तरफ से महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, फिर वो चाहे बच्चों की शिक्षा का खर्च हो या रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का l दूसरी ओर एक श्रेणी है जिनके पास धन की कोई कमी नहीं है उनको चिंता इस बात की नही रहती कि मेरे परिवार का पालन पोषण ठीक से हो पाएगा या नहीं बल्कि उन्हें चिंता रहती है अपने जमा पूंजी को सँभालने की l कई के पास तो इतना इकठ्ठा हो जाता है की उनकी पूंजी जमा करने के लिए हमारे देश के बैंक भी छोटे पड़ जाते हैं l फिर ऐसे लोगों को अपनी पूंजी सुरक्षित रखने के लिए स्विस बैंक जैसे विदेशी बैंको की सहायता लेनी पडती है l इस मामले में स्विट्ज़रलैंड तारीफे काबिल है l वहां पर सभी को समान रूप से आय विभाजित है l हर एक व्यक्ति के पास इतनी पूंजी जमा रहती है की वो अपना और अपने परिवार का भरण पोषण अच्छी तरह से कर सके l इससे वहां की अर्थव्यवस्था भी सुचारु रूप से चलती है l यही कारण है कि वो देश आज तरक्कीकी राह पर निरंतर अग्रसर है l हमारे देश में आज यह स्थति है कि हमारा अन्नदाता हमारे किसान भाई आर्थिक तंगी से तंग आकर आत्महत्या करने को मजबूर है l अमीर अमीर होता जा रहा है और गरीब गरीब होता जा रहा है l अगर ऐसे ही शहरी आधुनिकीकरण और चकाचोंध के बीच पिछड़ा एवं ग्रामीण क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया तो वो दिन दूर नहीं जब आने वाली पीढ़ी मे ऐसे कई लोग आ जाए जो गरीबी और बेरोजगारी के चलते अपना गुजारा ही ना कर पाए l गरीब और अमीर के बीच मे दुरी खत्म करने के लिए सबसे जरुरी है मध्यस्थता जो की आ सकती है बेरोजगारी मिटा कर, आय का समान रूप से विभाजन कर, हर वर्ग के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, एवं विभिन्न क्षेत्रों में समान रूप से सुविधा प्राप्त करा कर l 

हमारा देश आज कई उपलब्धियां प्राप्त कर चूका है, आगे भी कई उचाईयों को छूने की क्षमता रखता है l हमारे देश की युवा पीढ़ी हर क्षेत्र मे परचम लहरा रही है और सिर्फ राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम रोशन कर रही है l इसी के हमारे देश की संस्कृति, परंपरा, और सौन्दर्य की चर्चा पुरे विश्व भर मे है l इन सब के बीच गरीबी, बेरोजगारी, बलात्कार जैसी जघन्य घटनाएं देश की इस सुन्दर छवि को खराब करने का प्रयास कर रही है l इन्हे जल्द ही जड़ से मिटाने की आवश्यकता है l सरकार को योजनाएं बनाने के साथ साथ उनका सुचारु रूप से अमल हो इस बात पर भी गौर करना चाहिए l हाल ही मे सदन मे न्यूनतम पगार का बिल पास हुआ जिसमे सभी मजदूरों, कर्मचारियों को एक न्यूनतम आय प्रदान करने का प्रावधान है जिससे की वो अपना गुजारा अच्छे से कर सके l उम्मीद है सरकार की ये पहल गरीबी को कम करने मे कारगर सिद्ध होगी l और ऐसी कई योजनओं की आस है जिनसे की देश से पूर्ण रूप से गरीबी मिटाने मे सहायता मिले और हर परिवार के पास इतनी पूंजी तो हो की उनके परिवार का कोई भी सदस्य भूखा ना सोए l

नया वर्ष : इस साल का रिज़ोल्यूशन समाज हित मे ! Author- Robin Sharma  Law student  नया वर्ष प्रारम्भ हो चुका है l हर वर्ष की त...