गरीबी: भारत देश का भयावह दृश्य
'गरीबी', कहने को तो एक छोटा सा शब्द लेकिन खुद में इतनी ताकत रखता है कि जिस देश मे हो वहां की अर्थव्यवस्था को डगमगा सकता है l कहते हुए अच्छा तो नहीं लग रहा लेकिन हमारा देश भी उन देशों की सूची मे शामिल है जहाँ आज भी लोग गरीबी से जूझ रहे हैं l गरीबी से कई ज़िंदगियाँ तो मुसीबत मे जी ही रही है, साथ ही साथ इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है जो की गरीबी के चलते कमजोर होती जा रही हैl आज भी हमारे देश मे ऐसे कई इलाके हैं जहां के लोगों को दो वक़्त का खाना नसीब नहीं हो पाता l गरीबी के चलते छोटे छोटे बच्चे भीख मांगने को मजबूर हैं l कई बार तो उन्हें खाली पेट ही सोना पड़ता है l ये हमारे लिए गौरव की बात है कि हमारा देश राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेको उपलब्धियां प्राप्त कर रहा है, लेकिन इसी के साथ हमें इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि हमारे देश में ऐसी कई परिस्थितियां है ऐसी कई घटनाएं हैं जिनकी वजह से हमारा देश तरक्की के पथ पर डगमगा रहा है l इन सब से हम अच्छी तरह से वाकिफ है l आये दिन बलात्कार, हत्याएं, डकैती एवं अनेकों घटनाये इसमें शामिल है l गरीबी भी इसमें प्रमुख रूप से भागीदार है जो की आज का हमारा चर्चा का विषय है l
हाल ही मे संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह सामने आया कि भारत में अब भी 37 करोड़ लोग गरीब है, जो की पूरी जनसंख्या का तक़रीबन 28% है l ये आंकड़ा दर्शाता है कि किस तरह हम आधुनिकता और चकाचोंध के उजाले मे इस गरीबी रूपी अंधकार को नजरअंदाज कर रहे हैं l हालांकि इस रिपोर्ट के अनुसार भारत मे स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति से लोगों को गरीबी से बाहर निकालने मे मदद मिली है l 2006 से 2016 के बिच रिकॉर्ड 27.10 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं l निःसंदेह सरकार देश से गरीबी मिटाने के पुरे प्रयास कर रही है जिसके परिणाम स्वरुप गरीबी के आंकड़ों मे गिरावट भी आयी है, परन्तु आंकड़े स्थायी नहीं होते l हमें पूर्ण रूप से गरीबी मिटाने की ओर प्रयास करना चाहिए l सरकार आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए योजनाएं तो लागु करती है मगर कहीं ना कहीं इनका सही मायने मे संचालन नहीं हो पाता और परिणाम स्वरुप वे लोग इन योजनाओं से वंचित रह जाते हैं l कई बार तो इन योजनओं का लाभ लेने के लिए जिन प्रक्रियाओं से गुजरना होता है वे इतनी जटिल होती है कि आधे लोग ऐसे ही पीछे हट जाते है l अशिक्षित होना और जागरूकता की कमी भी कुछ मायने मे गरीबी का कारण है l इसलिए सरकार को इन पिछड़ा वर्गों में शिक्षा को बढ़ावा देने की ओर कदम उठाने चाहिए जिससे की जो आने वाली पीढ़ी है उन्हें इन सब परेशानियों का सामना ना करना पड़े l आज की इस बढ़ती आधुनिक जीवनशैली में जिस तरह महंगाई दर में बढ़ोतरी हो रही है और बेरोजगारी की समस्या गहरा रही है, यह आने वाले समय के लिए चिंता का विषय है l
आय की असमानता : गरीबी का सबसे बड़ा कारण
सुनने मे ये बात थोड़ी अजीब लगेगी लेकिन मेरे अनुसार आज भी हमारे देश मे असमानता कायम है l भले ही जात-पात, ऊंच - नीच के सन्दर्भ मे असमानता मे कमी हुई है लेकिन बहुत से ऐसे क्षेत्र है जिनमे असमानता के चलते लोगों को दुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है l रोजगार के क्षेत्र मे, शिक्षा के क्षेत्र मे, स्वास्थ्य सुविधाओं मे और ऐसे कई क्षेत्र है जिनमे लोगों को समान रूप से नहीं आंका जाता l हमारे देश मे बेरोजगारी की समस्या चरम सीमा पर है और जिसके पास रोजगार है वो भी संतुष्ट नहीं है l आय मे असमानता के चलते यह स्थति हो गई है की एक मध्यम वर्ग का व्यक्ति भी एक निश्चित पूंजी इकट्ठी नहीं कर पाता l गरीब के लिए तो महीने भर का राशन आ जाये बस इसके आगे तो वो सोच भी नहीं सकता l आम आदमी को हर तरफ से महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, फिर वो चाहे बच्चों की शिक्षा का खर्च हो या रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का l दूसरी ओर एक श्रेणी है जिनके पास धन की कोई कमी नहीं है उनको चिंता इस बात की नही रहती कि मेरे परिवार का पालन पोषण ठीक से हो पाएगा या नहीं बल्कि उन्हें चिंता रहती है अपने जमा पूंजी को सँभालने की l कई के पास तो इतना इकठ्ठा हो जाता है की उनकी पूंजी जमा करने के लिए हमारे देश के बैंक भी छोटे पड़ जाते हैं l फिर ऐसे लोगों को अपनी पूंजी सुरक्षित रखने के लिए स्विस बैंक जैसे विदेशी बैंको की सहायता लेनी पडती है l इस मामले में स्विट्ज़रलैंड तारीफे काबिल है l वहां पर सभी को समान रूप से आय विभाजित है l हर एक व्यक्ति के पास इतनी पूंजी जमा रहती है की वो अपना और अपने परिवार का भरण पोषण अच्छी तरह से कर सके l इससे वहां की अर्थव्यवस्था भी सुचारु रूप से चलती है l यही कारण है कि वो देश आज तरक्कीकी राह पर निरंतर अग्रसर है l हमारे देश में आज यह स्थति है कि हमारा अन्नदाता हमारे किसान भाई आर्थिक तंगी से तंग आकर आत्महत्या करने को मजबूर है l अमीर अमीर होता जा रहा है और गरीब गरीब होता जा रहा है l अगर ऐसे ही शहरी आधुनिकीकरण और चकाचोंध के बीच पिछड़ा एवं ग्रामीण क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया तो वो दिन दूर नहीं जब आने वाली पीढ़ी मे ऐसे कई लोग आ जाए जो गरीबी और बेरोजगारी के चलते अपना गुजारा ही ना कर पाए l गरीब और अमीर के बीच मे दुरी खत्म करने के लिए सबसे जरुरी है मध्यस्थता जो की आ सकती है बेरोजगारी मिटा कर, आय का समान रूप से विभाजन कर, हर वर्ग के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, एवं विभिन्न क्षेत्रों में समान रूप से सुविधा प्राप्त करा कर l
सुनने मे ये बात थोड़ी अजीब लगेगी लेकिन मेरे अनुसार आज भी हमारे देश मे असमानता कायम है l भले ही जात-पात, ऊंच - नीच के सन्दर्भ मे असमानता मे कमी हुई है लेकिन बहुत से ऐसे क्षेत्र है जिनमे असमानता के चलते लोगों को दुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है l रोजगार के क्षेत्र मे, शिक्षा के क्षेत्र मे, स्वास्थ्य सुविधाओं मे और ऐसे कई क्षेत्र है जिनमे लोगों को समान रूप से नहीं आंका जाता l हमारे देश मे बेरोजगारी की समस्या चरम सीमा पर है और जिसके पास रोजगार है वो भी संतुष्ट नहीं है l आय मे असमानता के चलते यह स्थति हो गई है की एक मध्यम वर्ग का व्यक्ति भी एक निश्चित पूंजी इकट्ठी नहीं कर पाता l गरीब के लिए तो महीने भर का राशन आ जाये बस इसके आगे तो वो सोच भी नहीं सकता l आम आदमी को हर तरफ से महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, फिर वो चाहे बच्चों की शिक्षा का खर्च हो या रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का l दूसरी ओर एक श्रेणी है जिनके पास धन की कोई कमी नहीं है उनको चिंता इस बात की नही रहती कि मेरे परिवार का पालन पोषण ठीक से हो पाएगा या नहीं बल्कि उन्हें चिंता रहती है अपने जमा पूंजी को सँभालने की l कई के पास तो इतना इकठ्ठा हो जाता है की उनकी पूंजी जमा करने के लिए हमारे देश के बैंक भी छोटे पड़ जाते हैं l फिर ऐसे लोगों को अपनी पूंजी सुरक्षित रखने के लिए स्विस बैंक जैसे विदेशी बैंको की सहायता लेनी पडती है l इस मामले में स्विट्ज़रलैंड तारीफे काबिल है l वहां पर सभी को समान रूप से आय विभाजित है l हर एक व्यक्ति के पास इतनी पूंजी जमा रहती है की वो अपना और अपने परिवार का भरण पोषण अच्छी तरह से कर सके l इससे वहां की अर्थव्यवस्था भी सुचारु रूप से चलती है l यही कारण है कि वो देश आज तरक्कीकी राह पर निरंतर अग्रसर है l हमारे देश में आज यह स्थति है कि हमारा अन्नदाता हमारे किसान भाई आर्थिक तंगी से तंग आकर आत्महत्या करने को मजबूर है l अमीर अमीर होता जा रहा है और गरीब गरीब होता जा रहा है l अगर ऐसे ही शहरी आधुनिकीकरण और चकाचोंध के बीच पिछड़ा एवं ग्रामीण क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया तो वो दिन दूर नहीं जब आने वाली पीढ़ी मे ऐसे कई लोग आ जाए जो गरीबी और बेरोजगारी के चलते अपना गुजारा ही ना कर पाए l गरीब और अमीर के बीच मे दुरी खत्म करने के लिए सबसे जरुरी है मध्यस्थता जो की आ सकती है बेरोजगारी मिटा कर, आय का समान रूप से विभाजन कर, हर वर्ग के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, एवं विभिन्न क्षेत्रों में समान रूप से सुविधा प्राप्त करा कर l
हमारा देश आज कई उपलब्धियां प्राप्त कर चूका है, आगे भी कई उचाईयों को छूने की क्षमता रखता है l हमारे देश की युवा पीढ़ी हर क्षेत्र मे परचम लहरा रही है और सिर्फ राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम रोशन कर रही है l इसी के हमारे देश की संस्कृति, परंपरा, और सौन्दर्य की चर्चा पुरे विश्व भर मे है l इन सब के बीच गरीबी, बेरोजगारी, बलात्कार जैसी जघन्य घटनाएं देश की इस सुन्दर छवि को खराब करने का प्रयास कर रही है l इन्हे जल्द ही जड़ से मिटाने की आवश्यकता है l सरकार को योजनाएं बनाने के साथ साथ उनका सुचारु रूप से अमल हो इस बात पर भी गौर करना चाहिए l हाल ही मे सदन मे न्यूनतम पगार का बिल पास हुआ जिसमे सभी मजदूरों, कर्मचारियों को एक न्यूनतम आय प्रदान करने का प्रावधान है जिससे की वो अपना गुजारा अच्छे से कर सके l उम्मीद है सरकार की ये पहल गरीबी को कम करने मे कारगर सिद्ध होगी l और ऐसी कई योजनओं की आस है जिनसे की देश से पूर्ण रूप से गरीबी मिटाने मे सहायता मिले और हर परिवार के पास इतनी पूंजी तो हो की उनके परिवार का कोई भी सदस्य भूखा ना सोए l

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